Nuclear Power: भारत में यहां होता है परमाणु सुरक्षा घेरे का निर्माण

भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल है, जो परमाणु ऊर्जा को उत्पन्न करने में सक्षम है. भारत परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल शांति कार्य और देश में ऊर्जा की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ही करता है. कोयला, गैस, हाइड्रो इलेक्ट्रिसिटी और पवन ऊर्जा के बाद Nuclear Power भारत की उर्जा का 5वां सबसे बड़ा स्रोत है. सन 2010 में भारत सरकार ने एक परियोजना तैयार की थी, जिसके तहत सन 2032 तक अपनी Nuclear Power क्षमता को 63 गीगावॉट तक पहुंचाना था. लेकिन इसके बाद सन् 2011 में जापान के फुकुशिमा में हुए परमाणु रिएक्टर हादसे के बाद इस योजना में बाधा पड़ गई. जहां कई जगहों पर परमाणु प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन होने लगे, तो कई राज्य सरकारों ने Nuclear Power प्लांट लगाने के लिए ज़मीन देने से इनकार कर दिया.

ज्योग्राफिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने सन 1901 से ही भारत की धरती पर रेडियोएक्टिव पदार्थों की प्रचुर संभावना की भविष्यवाणी कर दी थी. लेकिन उस समय अंग्रेज़ सरकार होने के कारण उस पर अधिक ध्यान नहीं दिया गया. दौलत कोठारी मेघनाद साहा और होमी जे भाभा जैसे वैज्ञानिक, स्वतंत्र रूप से अपने यूरोपियन साथियों के संपर्क में रहकर अपनी रिसर्च करते रहे. परमाणु रिसर्च में इन वैज्ञानिकों को साल 1940 के दशक में जेआरडी टाटा और टाटा ग्रुप का साथ मिला. फिर आज़ादी के बाद, परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में और तेज़ी से प्रगति हुई.

फिलहाल भारत में कुल 7 Nuclear Power प्लांट्स हैं, जिनमें 23 परमाणु रिएक्टर लगे हुए हैं. यह सभी Nuclear Power प्लांट Nuclear Power Corporation of India द्वारा संचालित किए जाते हैं, जो एक सरकारी संस्थान है.

ये हैं भारत के Nuclear Power प्लांट

1. तारापुर (महाराष्ट्र) : तारापुर एटॉमिक पावर स्टेशन, महाराष्ट्र के पालघर ज़िले में स्थित है. यह देश का पहला कमर्शियल Nuclear Power प्लांट है. इसकी स्थापना सन 1961 में हुई थी और सन 1969 से यह सेवा में है. तारापुर एटॉमिक पावर स्टेशन की स्थापना संयुक्त राज्य अमेरिका और इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एसोसिएशन के साथ मिलकर की गई थी. सन 1974 में भारत द्वारा परमाणु परीक्षण स्माइलिंग बुद्धा किए जाने के बाद से, पश्चिमी देशों ने भारत को तारापुर प्लांट के लिए यूरेनियम देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद से भारत को रूस, चीन और फ्रांस की ओर से यूरेनियम की सप्लाई की जा रही है.

2. राजस्थान एटॉमिक पावर स्टेशन (राजस्थान) : राजस्थान एटॉमिक पावर स्टेशन, राजस्थान के ही रावतभाटा में स्थित है. रावतभाटा न्यूक्लियर स्टेशन का निर्माण सन 1963 में शुरू हुआ था. सन 1973 से इसने Nuclear Power स्टेशन सेवा प्रदान करना प्रारंभ कर दिया था. यह परमाणु ऊर्जा स्टेशन भारत और कनाडा के संयुक्त तत्वाधान में निर्मित किया गया था. रावतभाटा पावर स्टेशन की कुल क्षमता 1,080 मेगावाट है.

3. नरौरा (उत्तर प्रदेश) : नरोरा एटॉमिक पावर स्टेशन, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर ज़िले में मौजूद है. नरौरा एटॉमिक पावर स्टेशन की स्थापना सन 1992 में हुई थी. इस एटॉमिक पावर प्लांट की कुल क्षमता 440 मेगावाट की है.

4.  मद्रास एटॉमिक पावर स्टेशन (चेन्नई) : मद्रास एटॉमिक पावर स्टेशन, चेन्नई से लगभग 80 किलोमीटर दूर कलपक्कम नामक स्थान पर मौजूद है. यह पावर स्टेशन एक बहुत ही उन्नत तकनीक से लैस है, जहां पर फ्यूल प्रोसेसिंग, वेस्ट ट्रीटमेंट जैसी सुविधाएं भी मौजूद हैं. इस एटॉमिक पावर स्टेशन के पहली यूनिट का निर्माण सन 1970 में हुआ था. वहीं दूसरी यूनिट, सन 2004 में शुरू हुई थी. इस परमाणु ऊर्जा प्लांट की कुल क्षमता 470 मेगावाट की है.

5. कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा प्लांट (तमिल नाडु) : कुडनकुलम Nuclear Power प्लांट भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा प्लांट है. यह परमाणु प्लांट कुडनकुलम, तिरुनेलवेली ज़िले मैं मौजूद है. इस परमाणु ऊर्जा प्लांट का निर्माण सन 2002 में शुरू हुआ था. इसकी कुल क्षमता 1,864 मेगावाट की है.

6. ककरापार परमाणु ऊर्जा प्लांट स्टेशन (गुजरात) : ककरापार Nuclear Power स्टेशन गुजरात के सूरत में मौजूद है. यह परमाणु ऊर्जा प्लांट तापी नदी के नजदीक स्थित है. इसका निर्माण सन 1984 में शुरू हुआ था, जिसकी कुल क्षमता 1,140 मेगावाट है.

7. कैगा एटॉमिक पावर स्टेशन (कर्नाटक) : कैगा एटॉमिक पावर स्टेशन, कर्नाटक में काली नदी के नजदीक उत्तरी कन्नड़ ज़िले में मौजूद है. यह परमाणु ऊर्जा स्टेशन सन 2000 से सेवा में है. इसकी कुल क्षमता 880 मेगावाट की है.

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