Rajasthan News: मुख्यमंत्री Ashok Gehlot वापस लेंगे ‘बाल विवाह संशोधन विधेयक’

Rajasthan विधानसभा द्वारा पिछले महीने पारित, “बाल विवाह विधेयक” फ़िलहाल कुछ दिनों से विवादों में घिरा नज़र आ रहा था. आपको बता दें, कि हाल ही में राज्य सरकार द्वारा इस विधेयक के अनिवार्य पंजीकरण पर, वर्ष 2009 के कुछ कानूनों में संशोधन किया गया था. इस विधेयक के अनुसार, यदि राज्य में कोई भी बाल विवाह होता है, तो उसे पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा. इस सूचना के सार्वजनिक होने के बाद, देश भर में विपक्ष सहित बहुत-सी राज्य सरकारों ने इसे आडें हाथों लिया था. हालांकि अब खबर आ रही है, कि “अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस” के मौके पर Rajasthan के मुख्यमंत्री, अशोक गहलोत की सरकार इस विधेयक को खारिज करने जा रही है.

मिली जानकारी के मुताबिक, इस विधेयक को खारिज करवाने की मंशा के साथ देश भर में बहुत से सामाजिक कार्यकर्ताओं ने, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. मगर अब Rajasthan सरकार ने खुद ही इस बात का ऐलान कर दिया है, कि यह विधेयक राज्यपाल के पास पारित होने के लिए नहीं भेजा जाएगा. वहीं इस विधेयक को वापस लेने की मांग के बीच मुख्यमंत्री, अशोक गहलोत ने यह स्पष्ट किया है, कि” हम सम्बंधित कानून द्वारा इसकी जांच कर रहे हैं और राज्यपाल से अनुरोध करेंगे, कि यह कानून हमारे पास वापस कर दिया जाए. साथ ही, हम इसकी जांच करवाएंगे और उसके बाद ही इस विधेयक पर आगे कोई फैसला लिया जाएगा”.

क्या है बाल विवाह विधेयक संशोधन?

आपको जानकारी के लिए बता दें, कि Rajasthan सरकार ने हाल ही में अनिवार्य विवाह पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2021 में, अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम 2009 की धारा 8 के तहत महत्वपूर्ण संशोधन करवाया था. यह संशोधन, “ज्ञापन प्रस्तुत करने के कर्तव्य” से संबंधित है. साथ ही, ये अधिनियम “विवाह के पंजीकरण के लिए ज्ञापन” के रूप में परिभाषित होता है.

Rajasthan सरकार का तर्क 

बाल विवाह से सम्बंधित इस विधेयक पर Rajasthan सरकार ने यह तर्क दिया था, कि ये विधेयक विवाह की उम्र को केंद्रीय कानून के अनुरूप बनाएगा. जहां 18 वर्ष की आयु वाली एक लड़की और 21 वर्ष के लड़के को विवाह की मान्यता प्राप्त है. बाल विवाह के पंजीकरण से उन्हें तेजी से रद्द करने में मदद मिलेगी. साथ ही, सरकार आसानी से अधिक पीड़ितों और विशेष रूप से विधवाओं तक पहुंचने में सफ़ल हो पाएगी.

क्यों हो रही विधेयक की आलोचना?

Rajasthan से चर्चा में आए इस विधेयक पर आलोचकों का कहना है, कि बाल विवाह का अनिवार्य पंजीकरण इसे वैध बना देगा. इसके अलावा लोगों का यह भी कहना था, कि विवाह प्रमाण पत्र वास्तव में सरकारी दावों के विपरीत, बाद में विवाह रद्द करने में बाधा भी बन सकता है. गौरतलब है, कि अदालतें विवाह प्रमाण पत्र की कमी को रद्द नहीं करने का कारण बता सकती हैं. आपको बता दें, कि बाल विवाह ज्यादातर सार्वजनिक चकाचौंध से दूर होते हैं और इसलिए इसे साबित करना मुश्किल हो जाता है. 


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