Amarinder Singh: कलह के बीच चुना तीसरा रास्ता, बना सकते हैं खुद का संगठन

पंजाब में चल रहे सियासी घमासान के बीच Capt Amarinder Singh ने ऐलान किया है कि वे अब कांग्रेस में नही रहेंगे, साथ ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की अटकलों को भी विराम दिया है. कैप्टन ने साफ तौर पर यह कह दिया है कि वे बीजेपी में भी शामिल नही होंगे. मीडिया चैनल से बात करते हुए उन्होंने कहा, कि वे फिलहाल कांग्रेस में हैं और सही समय आने पर Sonia Gandhi को अपना इस्तीफ़ा सौंप देंगे. 

Capt Amarinder Singh ने अपने इस्तीफ़े से लेकर अभी तक हुई सभी घटनाओं के लिए Navjot Singh Sidhu को जिम्मेदार ठहराया है. कैप्टन सार्वजनिक तौर पर कई बार कह चुके हैं, कि वे आगामी चुनावों में Sidhu को हराने के लिए कुछ भी करेंगे. 

जानें Captain Amarinder Singh और Sidhu के बीच विवाद की पूरी कहानी

Amarinder Singh और Sidhu के बीच विवाद नया नहीं है. दोनों के बीच तनातनी काफ़ी लंबे समय से जारी है. दोनों के बीच लगातार ज़ुबानी जंग चलती ही रहती थी.

Imran Khan से मुलाकात 

Imran Khan जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने Sidhu को शपथ ग्रहण समारोह में आने का न्यौता दिया था. उस वक्त Amarinder Singh ने Sidhu को पाकिस्तान न जाने की सलाह दी थी, लेकिन Sidhu उनकी बात को नज़रंदाज़ करते हुए पाकिस्तान चले गए. वहां उन्होंने Imran Khan ही नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सेना के प्रमुख Qamar Javed Bajwa से भी मुलाकात की. इसके उपरांत कई दिनों तक विवाद चलता रहा. कैप्टन ने इस्तीफ़ा देने के बाद भी कहा था कि, “Navjot Singh Sidhu अभी भी  Imran Khan और Bajwa के साथ है. Sidhu राष्ट्र सुरक्षा के लिए खतरा है.” 

लोकसभा चुनाव में Sidhu की पत्नी का टिकट कटना

2019 के लोकसभा चुनावों में Navjot Singh Sidhu की पत्नी, Navjot Kaur Sidhu टिकट चाहती थीं, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया. इसके बाद Navjot Kaur ने आरोप लगाया था, कि उन्हें Amarinder Singh की वजह से टिकट नहीं दिया गया. वहीं, Navjot के पति Sidhu ने भी अपनी पत्नी का समर्थन किया था. इसके बाद Amarinder Singh ने भी Sidhu पर जवाबी हमला किया था. 

Amarinder Singh का बयान ‘मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं Sidhu’ 

2019 के लोकसभा चुनावों में जब Captain Amarinder Singh पटियाला वोट डालने पहुंचे, तब मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा था, कि मैं Sidhu को बचपन से जानता हूं. वो शायद मुझे हटाकर खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं. अगर वो महत्त्वाकांक्षी हैं, तो इसमें कुछ गलत नहीं है. मेरी उनसे कोई जुबानी जंग नहीं हुई है. इस बयान के बाद दोनों के बीच खटास और बढ़ गई थी.

2019 मंत्रिमंडल फेरबदल 

2019 में Amarinder Singh की सरकार में मंत्रिमंडल का फेरबदल हुआ. Sidhu से स्थानीय विभाग ले लिया गया और उन्हें बिजली विभाग सौंप दिया. Sidhu इस बात से खफ़ा हो उठे और उन्होंने 14 जुलाई 2019 को पंजाब कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया. इसके बाद Sidhu लगातार Amarinder Singh के कामकाज पर सवाल उठाते नज़र आए. Amarinder Singh को Sidhu का इस तरह सरकार के खिलाफ़ बोलना रास नहीं आ रहा था. कैप्टन ने इसको लेकर कई बार हाईकमान से भी शिकायत की थी. 

Sidhu का प्रधान बनना 

Amarinder Singh और Sidhu के बीच तनातनी काफ़ी बढ़ने लगी थी. वहीं, Sidhu लगातार Amarinder Singh पर ज़ुबानी हमला किए जा रहे थे. Amarinder Singh इस बात से काफ़ी खफा हो उठे थे. दोनों के बीच बढ़ते विवाद को देखकर पार्टी हाईकमान को बीच में आना पड़ा. बीच बचाव के लिए Sidhu को पंजाब कांग्रेस ईकाई का प्रधान बनाया गया और यह हिदायत दी गई, कि वे अब से Amarinder Singh के खिलाफ़ पार्टी विरोधी बयान नहीं देंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ, Sidhu अपना पुराना राग अल्पाए हुए थे. वहीं, पंजाब कांग्रेस के लगभग 40 विधायकों ने भी Capt. Amarinder Singh के खिलाफ़ मोर्चा खोल दिया. 

Amarinder Singh को देना पड़ा इस्तीफ़ा

Capt. Amarinder Singh और Sidhu का विवाद इस तरह आगे बढ़ा, कि कैप्टन को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा. अपने खिलाफ़ हो रही विधायकों की मोर्चाबंदी को लेकर कैप्टन ने इस्तीफा देना ही उचित समझा. कैप्टन ने 18 सितंबर को राज्यपाल के समक्ष उपस्थित होकर अपना इस्तीफ़ा उन्हें पेश किया. हालांकि, Amarinder Singh ने इस्तीफे से पहले Sonia Gandhi से बात की थी, लेकिन Sonia Gandhi ने सॉरी कहते हुए बात को ख़त्म कर दिया. 

इस्तीफ़े के बाद Amarinder Singh ने कहा था कि ये उनका अपमान है. उन्हें अपमानित होकर यह कुर्सी छोड़नी पड़ी. साथ ही कहा था, कि Rahul Gandhi और Priyanka Gandhi को उनके खिलाफ़ भड़काया गया है. वे एक फौजी हैं और पीछे नहीं हटेंगे, राजनीति में उनके पास कई विकल्प हैं. 

कैप्टन की Amit shah से मुलाकात 

मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के बाद Capt Amarinder Singh ने दिल्ली में, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah से मुलाकात की. जानकारी के मुताबिक़, 45 मिनट चली इस मुलाकात में लम्बे समय से चले आ रहे किसान आंदोलन को लेकर चर्चा हुई. हालांकि, इस मुलाकात के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं. जानकारी के मुताबिक़ कैप्टन सीधे तौर पर भाजपा से नहीं जुड़ेंगे, लेकिन अपना अलग संगठन बनाकर भाजपा को समर्थन दे सकते हैं. चर्चा यह भी है, कि कैप्टन कृषि कानून रद्द करवाकर भाजपा के लिए पंजाब में रास्ता बना सकते हैं. 

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