ISRO: 5 उपलब्धियां जिन्होंने दुनिया को दिखाई भारत की ताकत

आधुनिक दुनिया में विज्ञान के बढ़ते प्रभाव के बीच भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, ISRO ने अपनी उपलब्धियों से दुनिया के नक्शे पर भारत को एक अलग पहचान दिलाई है. जहां पहले भारत, अपने उपग्रह के लिए दूसरे देशों पर निर्भर था, वहीं अब दूसरे देश अपने उपग्रहों को पृथ्वी से बाहर भेजने के लिए ISRO से मदद ले रहे हैं.

वर्ष 1969 में, ISRO का गठन Vikram Sarabhai की दृष्टि से प्रेरित था, जिन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक भी कहा जाता है. इनके द्वारा बनाए गए पहले उपग्रह का नाम आर्यभट था, जिसे सोवियत संघ (रूस) की सहायता से 19 अप्रैल 1975 को पृथ्वी से छोड़ा गया था. ISRO ने समय के साथ फिर से साबित कर दिया है कि वह पूरी तरह से ‘राष्ट्रीय विकास के लिए अंतरिक्ष प्रोद्योगिकी को आगे बढ़ाने की दृष्टि से मजबूती से खड़ा है. 

आइए जानते हैं ISRO की 5 गौरवपूर्ण उपब्धियां

1. चंद्रयान-1 

22 अक्टूबर 2008 को इस स्वदेशी मानव रहित अंतरिक्ष यान को चंद्रमा की सतह पर भेजा गया था. इससे पहले दुनिया में मात्र 6 देश ही ऐसा कर पाए थे. ISRO का यह पहला ऐसा मिशन था, जिसने सदी की सबसे बड़ी खोज करते हुए दुनिया को यह बताया की चांद की सतह पर पानी है. चंद्रयान की लॉन्चिंग PSLV-C 11 रॉकेट से की गई थी. चंद्रयान-1 को चांद की यात्रा के लिए भेजा गया था. चंद्रयान 1 ने करीब 11 महिने तक काम किया, और चांद के चारों तरफ 3400 से अधिक चक्कर लगाए. चंद्रयान-1 द्वारा की गई खोज ने, उस समय दुनिया के कई शक्तिशाली देशों को भी हैरत में डाल दिया था.

2. मंगलयान

5 नवंबर 2013 को ISRO ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C 25 के माध्यम से मंगलयान उपग्रह को सफलतापूर्वक छोड़ा था, जिसने 24 सितंबर 2014 को मंगल की सतह पर कदम रखकर दुनिया में एक नया मुकाम हासिल किया था. भारत के लिए ये एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि एक ही प्रयास में मंगल की सतह पर कदम रखने वाला भारत दुनिया का एकमात्र देश बन गया था. मंगलयान मिशन को सबसे सस्ता मिशन भी कहा जाता है. इस पर मात्र 450 करोड़ रुपए खर्च हुए थे. सोवियत संघ, रूस, अमेरिका और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बाद मंगल पर यान भेजने वालों की सूची में भारत ने भी अपना नाम दर्ज करवा लिया था. 

3 जीएसएलवी मार्क-3 का सफल प्रक्षेपण(GSLV-MK 3)

मंगलयान की सफलता के बाद, दिसंबर 2014 में देश के सबसे बड़े रॉकेट, जियो सिंक्रोनस लॉन्च व्हीकल, मार्क 3 (जीएसएलवी मार्क-3) का सफल प्रक्षेपण कर ISRO ने दुनिया को ये दिखा दिया था, कि भारत अब दुनिया में भारी यान और इंसानों को भी भेजने में सक्षम है. अंतरिक्ष में इंसान भेजने की काबिलियत, फिलहाल अमेरिका, रूस और चीन के0 पास ही है. 

4 104 सेटेलाइट लॉन्च 

वर्ष 2014 में ISRO ने मेगा मिशन के जरिए एक नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया था. PSLV अंतरिक्ष यान के जरिए भारत ने 104 सेटेलाइटों को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था. इससे पहले यह रिकॉर्ड, रूस के नाम था, जिसने 37 सेटेलाइट एक साथ लॉन्च कर विश्व रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया था. भारत के इस लॉन्च में 101 छोटे सेटेलाइट थे जिनका वजन 664 किलोग्राम था. इसकी एक और खास बात यह थी कि इन्हे वैसे ही अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया था, जैसे एक स्कूल बस अलग अलग ठिकानों पर बच्चों को छोड़ती है. 

5 जीएसएलवी मार्क 2(GSLV-MK 2)

जीएसएलवी मार्क 2 का सफल प्रक्षेपण भी ISRO की बड़ी उपलब्धियों में शामिल था, क्योंकि इसमें भारत में में बनाया हुआ क्रयाजोनिक इंजन ही लगाया गया था. इस उपलब्धि के बाद सेटेलाइट लॉन्च करने के लिए  भारत को अन्य देशों की सहायता नही लेनी पड़ी, भारत पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बन गया.  


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