NHRC: प्रधानमंत्री, Narendra Modi ने दिया राष्ट्र के नाम संबोधन दिया है.

NHRC: मानव अधिकार दिवस देता है ‘आत्मवत्त सर्वभूतेषु’ का संदेश- प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री, Narendra Modi ने आज 12 अक्टूबर 2021 को 28वें Nation Human Rights Commision (NHRC) के स्थापना दिवस कार्यक्रम को, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया है. प्रधानमंत्री ने कहा है, कि “मानवाधिकारों और हाशिए पर पड़े लोगों की गरिमा की रक्षा करने में, NHRC महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है”. आपको बता दें, कि इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के अलावा भारत के केंद्रीय गृह मंत्री, अमित शाह और NHRC के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा भी शामिल थे.

NHRC के इस कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री, Narendra Modi ने कहा है, कि “यह कार्यक्रम आज उस समय हो रहा है, जब देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है. हम सदियों से अपने अधिकारों के लिए लड़ते आए हैं, यह लड़ाई चाहे एक देश के रूप में हो या समाज, हमने हमेशा समाज में हो रहे अत्याचारों के खिलाफ़ आवाज उठाई है. एक समय ऐसा भी था, जब पूरा विश्व युद्ध की हिंसा में झुलस रहा था. तब भारत ने पूरे विश्व को अहिंसा और अधिकार का मार्ग दिखाया था. आज यह हमारा सौभाग्य है, कि हम अमृत महोत्सव के माध्यम से महात्मा गांधी के उन जीवन मूल्यों को अपने जीवन में अपना रहे हैं”. साथ ही प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए कहा है, कि “आज मुझे इस बात से काफी संतुष्टि है, कि NHRC भारत के नैतिक संकल्पों को काफ़ी मजबूती प्रदान कर रहा है. साथ ही, भारत ‘आत्मवत्त सर्वभूतेषु’ के महान आदर्शों और संस्कारों पर भी खरा उतर रहा है”. 

प्रधानमंत्री, Narendra Modi ने ‘आत्मवत्त सर्वभूतेषु’ के अर्थ की व्याख्या देते हुऐ कहा है, कि “मानव और जीव-जंतु में कोई फर्क नहीं है. भारत सदियों से विश्व को समानता और मानवता से जुड़े अधिकारों का पाठ पढ़ा रहा है. वहीं, NHRC ने इसको एक नयी दिशा प्रदान की है. जब-जब दुनिया भ्रमित हुई, तब-तब भारत ने मानव अधिकारों की बात करके दुनिया को जागृति प्रदान की है”.

आपको जानकारी के लिए बता दें, कि NHRC मानव अधिकारों के प्रचार और संरक्षण के लिए काम करता है. इस आयोग की स्थापना, 12 अक्टूबर 1993 को हुई थी. यह आयोग राष्ट्रहित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो मुख्य रुप से मानवाधिकारों और हाशिए पर पड़े लोगों की गरिमा की रक्षा है. इसके अलावा, आयोग मानवाधिकारों को ढेस पहुंचाने वाले कृत्यों का संज्ञान लेता है. साथ ही, पूछताछ के माध्यम से पीड़ितों को मुआवज़ा दिलाने के लिए सार्वजनिक अधिकारियों से सिफारिश भी करता है.

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