Doordarshan: 80 के दशक में इन किरदारों से गूंजता था घर का आंगन

वर्ष 1959 में शुरू हुआ Doordarshan आज भारत में अपने 62 स्वर्णिम वर्ष पूरे कर चुका है. हमारे देश में एक दौर ऐसा भी था, जब घर की छत पर लगा एंटीना प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था. जब घर में रखे टेलीविज़न के आसपास एक पूरा परिवार साथ बैठकर कुछ हल्के-फुल्के कार्यक्रमों से अपना मनोरंजन करता था. इसी दौर को सहारा दिया Doordarshan ने.

भारत में Doordarshan के कदम 

आज की डिजिटल पीढ़ी उस दौर से एकदम भिन्न है, जब सुबह की शुरुआत Rangoli के मीठे गानों से हुआ करती थी. जहां रात 8 बजे आसपास के घरों से आती वो Ramayan की धुन इशारा होती थी, कि समय हो गया है Doordarshan पर नज़र टिकाने का. छोटे से पर्दे पर चलती-बोलती तस्वीरें दिखाने वाला ये चैनल, एक समय लोगों के दैनिक जीवन का बहुत अहम हिस्सा था. जो लोगों को संस्कृति, समाज और नैतिकता का पाठ पढ़ाने में कामयाब रहा.

एक नज़र दूरदर्शन द्वारा दर्शकों को दिए कुछ अनमोल तोहफ़ों पर- 

1. Ramayan (1986)

वर्ष 1986 में शुरू हुए रामायण का दर्शकों पर ऐसा जादू चला, कि लोग इसके प्रसारण के दौरान यात्रा नहीं करते थे. इसके अलावा, कार्यक्रम के अंत में हर घर में आरती और प्रसाद वितरण होता था. 

2. Chandrakanta (1994)

जब भी कभी Doordarshan पर ये पंक्तियाँ सुनने में आती थी, ‘नौगढ़, विजयगढ़ में थी तकरार, नौगढ़ का थो राजकुमार’, तो समझ आ जाता था कि चंद्रकांता शुरू हो गया है. इस कार्यक्रम के प्रति लोगों की ऐसी दीवानगी थी कि, अभिनेत्री Shikha Swaroop को लोग सच में राजकुमारी चंद्रकांता समझते थे. 

3. Yug (1996)

वर्ष 1996 में शुरू होकर 1998 तक चलने वाले इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण थी. अभिनेत्री Hema Malini. इसके माध्यम से Doordarshan ने दर्शकों के बीच भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और उनके अद्भुत साहस को बयान किया. 

4. Shanti (1994)

Mandira Bedi के इस सीरियल को शायद ही कोई भुला पाया हो. पुरुष प्रधान इस समाज़ को, Doordarshan ने एक पत्रकार लड़की, शांति के इस किरदार के माध्यम से आइना दिखाया. 

5. Mahabharat (1988)

भारत के गौरवशाली इतिहास कि झलक दिखाते इस कार्यक्रम ने, दर्शकों को सही-गलत का सटीक परिचय दिया. इसके परिणामस्वरूप, आज लोगों को क्या करना है से ज़्यादा, क्या नहीं करना ये पता है. वहीं आज भी Nitish Bharadwaj को काफी लोग श्री कृष्ण मानते हैं.

6. Shaktimaan (1997)

Doordarshan पर हर रविवार को आने वाले इस कार्यक्रम के लाखों बच्चे दीवाने हुआ करते थे. जहां उन्हें शक्तिमान और गंगाधर के बीच की रोमांचक उथल-पुथल काफी पसंद की जाती थी. इसके अलावा, कार्यक्रम के अंत में दिए गए सामाजिक सुझाव पर बच्चे Shaktimaan की बातों पर अमल भी करते थे. वो था ना, ‘छोटी-छोटी पर मोटी बातें’.

7. Buniyaad (1986)

Ramesh Sippy द्वारा निर्देशित यह कार्यक्रम, साल 1947 में हुए भारत के बंटवारे के इर्द-गिर्द घुमता है. इसमें Alok Nath के किरदार, मास्टर हवेली राम की भूमिका अब तक दर्शकों के स्मृति पटल पर अपनी छाप छोड़े हुए है. 

8. Nukkad (1986)

वर्ष 1986 के दौरान प्रसारित इस कार्यक्रम के किरदार, खोपड़ी और कादरभाई को कौन भूल सकता है. 40 एपिसोड वाला ये कार्यक्रम समाज के निचले तबके के लोग और उनकी निज़ी ज़िन्दगी पर आधारित था.

9. Mungerilal ke Haseen Sapne (1989)

Doordarshan के इस कार्यक्रम का ही असर है कि, इसके नाम को लोग आम बोलचाल वाला मुहावरा बना चुके हैं. आपको बता दें, कि वर्ष 1989 में शुरू हुए इस कार्यक्रम को Prakash Jha ने बनाया था.  

10. The Jungle Book (1989)

आज भी लोग, बीती यादों में गुम हो जाते हैं, जब कोई मोगली का जिक्र करता है. इस शो का ये गाना ये, ‘जंगल-जंगल बात चली है’ लोग आज भी गुनगुनाता नज़र आते हैं. आपको बता दें, कि इस कार्यक्रम पर आधारित फिल्म भी वर्ष 2016 में रिलीज़ हुई थी. वहीं आज भी मोगली-बघीरा की दोस्ती के लोग दीवाने हैं.

1959 से 2021 तक कितना बदला है Doordarshan

साल 1959 में शुरू हुआ Doordarshan का सफर, आज कई कसौटियों को पार करके सम्मानित चैनलों की श्रेणी में है. इसके नाम से ही अक्सर अतीत की कुछ बातें, दर्शकों को गुदगुदा जाती हैं. एक नज़र Doordarshan के सफर पर- 

आधारबदलाव
1.शुरुआतवर्ष 1975 के दौरान, Doordarshan का प्रसारण केवल तीन दिन आधा-आधा घंटा होता था.
2.खबर और प्रसारणवर्ष 1965 में इस चैनल पर न्यूज़ बुलेटिन की शुरुआत हुई और रोज़ाना प्रसारण भी.
3.रंग और विज्ञापनवर्ष 1982 में रंगीन दूरदर्शन की शुरुआत हुई और वहीं ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ लोगों को एकता का संदेश देने में कामयाब रहा. 
4.Television Rating Point (टीआरपी)दशकों तक सफल रहा Doordarshan, Covid-19 महामारी में टीआरपी की रेस में भी प्रथम रहा. जहां इसने, 77 मिलियन दर्शकों के बीच जगह बनाई थी. 

क्या Covid-19 ने दिया दूरदर्शन को पुनर्जन्म?

भारत में 80s और 90s के दशक में भारतीय दर्शकों के दिल पर राज करने वाला Doordarshan, कुछ सालों तक जैसे कहीं गुम हो गया था. मगर इसको दोबारा जन्म दिया, Covid-19 के दौरान लगे लाॅकडाउन ने. जब भारत का लगभग हर नागरिक घर में रहने को बाध्य था, तो Doordarshan ने अपने पिटारे से निकालकर कुछ ऐसे कार्यक्रमों को पेश किया, जो दर्शकों के दिल को छू गए. अब ऐसा माना जा रहा है, कि आने वाले समय में चैनल प्रसारण को लेकर कुछ शानदार भूमिका में दिख सकता है.

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